जब जीव संसार में आता है । सब बहुत खुश होते है कि हमारे आँगन
कोई
आया या आई है । उस आने वाले कोई ज्ञान नही होता कि माँ कौन होती है । सब
प्यार करते है कि हमारा बच्चा है । उसके बाद बच्चा संसार के मोह में फंस
जाता है और संसार की दल -दल में फसता चला जाता है । जब वह बड़ा होता है
संसार के मोह फस जाता है उसके बाद रिश्ते बनने शुरू हो जाते है जैसे कि माँ -पिता,दादा -दादी,चाचा -चाची,ताया -ताई ,बुआ
-फुफा और नाना -नानी ,मामी -मामा आदि । स्कूल की शुरू हो जाता है उसमें
मित्र मेला जुड़ जाता है नोकरी या कारोबार शुरू , उसके बाद शादी हो जाती
है उसके बच्चे हो जाते हैजीव अपना घर बन जाता है । माया मोह इतना बढ़ जाता है कि वह
संसार को अपना घर समझने लग जाता है धीरे-धीरे वह मोह के तार झुटने लग जाता
है जिनको अपना समझता वह उसको जब हम जिन्दा तो कभी मेरा ख्याल नही आया । अब यहाँ बैठे है आँसू बाह रहे ।।
जब हम जिन्दा थे कभी पास बैठे नही दुनियाँ को दिख-दिख कर आसूँ बहा रहे हो ।।
जब जिंदा थे कभी खाने को पूछा नही अब अनाज को दान देकर लोगो को दिखा रहे हो ।
जब जिन्दा थे कभी पहने को पूछा नही अब मरने के बाद क़फन उढ़ा रहे हो ।।
जब जिन्दा थे कभी साथ चले नही । मरने के बाद क्यों साथ जा रहे हो ।।
यदि मदरडे इतना ही प्यारा है,उन माताओ का क्या जिनका घर अन्दर सम्मान नही होता । वो भी माँ जो अनाथ-आलय व वृद्धआश्रम में जीवन बिता देती है अपनी अन्तर आत्मा की आवाज सुनकर इसे लाइक करे ।