Wednesday, 2 February 2022

GEETA KA GYAAN

                     

                         यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।

                           अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥

                         परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम।
                       
                         धर्मसंस्थापनार्थाय  सम्भवामि युगे युगे ।।

हे भरतवंशी! जब भी और जहाँ भी धर्म का पतन होता हैं और अधर्म की प्रधानता होने लगती है, तब तब मैं अवतार लेता हूँ।
मेरे निजी अनुभव के अनुसार है जब नैतिक मूल्यों से अधिक भौतिक मूल्यों का बढ़ावा देना कहते है। 
भक्तों का उद्धार करने, दुष्टों का विनाश करने तथा धर्म की फिर से स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूं।
 जैसे भगवान कृष्ण की माता जी को कंस ने  अपनी बहन और उनके पति को दण्डित किया गया था।

Saturday, 16 August 2014

aaj ka vichar

आज का विचार :- जब एक जीव संसार मेँ आता है । तब वह भगवान से छूट कर संसार के बन्धन  में बन्द जाता है । उसको अपना समझने लग जाता है,तब भूल जाता है मै क्यों आया था । संसार को ही अपना ही भारी भूल होती है । जिनके यह सब करते है कभी अपने नही होते हैं हमेशा उस परवरदिगार को अपना जाने यही जीवन सत्य ह

Monday, 28 July 2014

bhai bhin ka rishta

 जो बहिन से कुछ चाहे वह भाई नही होता है । लोग अपनी बहिन के घर से कुछ इच्छा रखे  वह भाई होता  है । जो अपनी इच्छा को पूर्ण करने का साधन समझे  है । क्या भाई होता है । 

Saturday, 12 July 2014

Aaj guru purnima hai

मै अपने गुरु चरण वन्दना करती हुँ । सभी को गुरु पूर्णिमा पर बधाई देती हुँ ।

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Tuesday, 10 June 2014

Do Good to Have Good

हे अर्जुन ! जो कर्म शास्त्रविधिसे नियत किया हुआ और कर्तापनके अभिमान से रहित,फलको न चाहनेवाले पुरुषद्रारा बिनारागद्देषसे किया हुआ है वह सात्तिवक कर्म है जो कर्ता आसक्ति से रहित और अहंकार के वचन न बोलने वाला,धैर्य और उत्साह से युक्त कार्यके सिद्द होने और न होने में । अच्छा बोओगे अच्छा पाओगे यदि बुरा करो तो ही होगा बुरा 

Tuesday, 27 May 2014

dhan ka nasha

जीवन में यदि कुछ तरक्की करना चाहते हो,अपने बड़ो को आदर-सम्मान करो ,उनका जीवन सहयोग करोगे तथा जीवन खुशियाँ आपके साथ रहेगी है । धन और दौलत स्वयं तुम्हारे कदमों में रहेंगे । हमेशा अपने जीवनमें  सच्चे  मार्ग पर चलोगे
अपने घर धन -दौलत चाहते है सच का साथ हमेशा धन बढ़ता है और झूठ धन का नाशा कर देता है \

Saturday, 24 May 2014

karam phal

जैसे पृथ्वी शीध्र फल नहीं देती वैसे ही संसार में किया हुआ अधर्म तत्काल फल नहीं देता है,किन्तु किया हुआ अधर्म करने वाले को धीरे -धीरे जल भूल से नष्ट कर देता है । जो अधर्म अपने पर फलीभूत नहीं होता तो वह पुत्रो पर पड़ता है नहीं तो पोत्रो पर पड़ता है । बात यह मनुष्य किया गया अधर्म उसको फल दिये बिना नहीं छोड़ता है ।