Sunday, 22 September 2013

अनमोल वचन

श्री कृष्ण जी कहते हैं:
जिसने मन को जीत लिया है उसके लिए मन सर्वश्रेष्ठ मित्र है, किन्तु जो ऐसा नहीं कर पाया उसके लिए मन सबसे बड़ा शत्रु बना रहेगा। 
जो मुझे सर्वत्र देखता है और सब कुछ मुझमे देखता है उसके लिए न तो मै  कभी अदृश्य होता हू और न वह मेरे लिए अदृश्य होता है। 
अपने मन को मेरे नित्य चिंतन में लगाओ, मेरे भक्त बनो, मुझे नमस्कार करो और मेरी ही पूजा करो। इस प्रकार मुझमे पूर्णतया तल्लीन होने पर तुम निश्चित रूप से मुझको प्राप्त होगे।  
तुम जो कुछ करते हो, जो कुछ खाते हो, जो कुछ अर्पित करते हो या दान देते हो और जो भी तपस्या करते हो, उसे मुझे अर्पित करते हुए करो। 

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